सर्विस चार्ज का दबाव नहीं बना सकते होटल-रेस्टोरेंट, केंद्र हुआ सख्त; सरकार जल्द लाएगी गाइडलाइन

केंद्र सरकार ने होटल-रेस्टोरेंट मालिकों को हिदायत दी है कि वे ग्राहकों से जबरदस्ती दबाव बनाकर 'सर्विस चार्ज' नहीं वसूल सकते हैं.

Update: 2022-06-02 17:16 GMT

Restaurant Service Charge

अक्सर होटल-रेस्टोरेंट में बिल के साथ सर्विस चार्ज (Service Charge) जोड़ दिया जाता है. ग्राहक भी होटल या रेस्टोरेंट से बिना सवाल-जवाब किए सर्विस चार्ज के साथ पेमेंट कर देते हैं. हालांकि ये चार्ज ट्रांजैक्शन के समय ही लिया जाता है, न की सर्विस लेते वक्त. अब इस पर केंद्र सरकार ने रोक लगाते हुए होटल-रेस्टोरेंट के मालिकों को हिदायत दी है कि वे दबाव बनाकर किसी भी ग्राहक से जबरदस्ती सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते हैं. इसके लिए जल्द ही केंद्र सरकार सख्त नियम बनाते हुए गाइडलाइन लाने जा रही है. 

केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) की आज नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के साथ हुई, जिसमें विभाग ने बैठक में सर्विस चार्ज न वसूलने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं. 

dining bill


रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज का नियम साफ कहता है कि ग्राहक तय करेगा कि उसे सर्विस चार्ज देना है या नहीं. रेस्टोरेंट इसके लिए ग्राहकों पर दबाव नहीं बना सकते. ग्राहक को यह चार्ज देना अनिवार्य नहीं है. किसी भी ग्राहक को सर्विस चार्ज देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. लेकिन इस नियम का पालन नहीं होता और ग्राहकों की जेब काटी जाती है. सरकार अब इसी नियम को ठोस कर देगी कि रेस्टोरेंट या होटल जबरन किसी ग्राहक से सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते.

क्या है सर्विस चार्ज

जब हम कोई प्रोडक्ट या सर्विस खरीदते हैं तो उसके लिए कुछ फीस चुकानी होती है. इसी फीस को सर्विस चार्ज कहा जाता है. आम तौर पर यह चार्ज ट्रांजैक्शन के वक्त लिया जाता है, न कि पहले. अगर होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं तो बिल पेमेंट के वक्त आपसे यह चार्ज लिया जाएगा. बैंक में कोई ट्रांजैक्शन करते हैं तो उसी वक्त सर्विस जार्ज लिया जाएगा. ट्रैवल और टूरिज्म की एजेंसियां भी प्रमुखता से सर्विस चार्ज वसूलती हैं. सर्विस चार्ज में प्रोसेसिंग कॉस्ट को शामिल किया जा सकता है.

सर्विस चार्ज केवल रेस्टोरेंट ही नहीं लेते. कई और सेवाएं हैं जहां सर्विस चार्ज वसूलने का नियम है. होटल और रेस्टोरेंट के अलावा बैंकिंग और इंश्योरेंस में इसका प्रचलन अधिक देखा जाता है. तो आइए जानते हैं कि सर्विस चार्ज का नियम क्या है और सरकार इस पर क्या तैयारी कर रही है.

बिल का कुछ प्रतिशत वसूला जाता है सर्विस चार्ज

सर्विस चार्ज आपके होटल या रेस्टोरेंट के बिल में सबसे नीचे लिखा होता है. ये आमतौर पर आपके बिल का कुछ प्रतिशत हो सकता है. ज्यादातर ये 5% रहता है. यानी आपका बिल अगर 1,000 रुपए का हुआ है तो ये 5% सर्विस चार्ज 1,050 रुपए हो जाएगा.

अलग-अलग नाम के सर्विस चार्ज

कोई जरूरी नहीं कि हर जगह आपसे सर्विस चार्ज के नाम पर ही पैसे लिए जाएं. इसे कहीं-कहीं सर्विस फी भी कहा जाता है. होटल में बुकिंग फीस, ट्रैवल में सिक्योरिटी फीस और बैंकों में अकाउंट मेंटेनेंस फीस और कस्टमर सर्विस फीस के नाम से पैसा वसूला जाता है. इसे आसान भाषा में एक उदाहरण से समझते हैं. किसी शोरूम में जब आप गाड़ी खरीदने जाते हैं तो आपसे सर्विस चार्ज के नाम पर अलग-अलग फीस ली जाती है. यह फीस प्री-डिलीवरी इंसपेक्शन चार्ज, एक्सेसरीज फिटिंग चार्ज और कार्ड स्वाइपिंग चार्ज के नाम से ली जाती है. ये सभी पेमेंट सर्विस चार्ज के नाम पर देने होते हैं.

बैंक और रेस्टोरेंट का नियम

बैंकों में फ्लैट या फिक्स्ड रेट पर सर्विस चार्ज लिया जाता है. खाता खोलते वक्त बैंक आपसे मंथली फीस जिसे मेंटेनेंस चार्ज भी कहते हैं, वसूलता है. हर महीने के अंत में बैंक आपके खाते से यह फीस काट लेगा. बैंक के एटीएम की सेवा लेते हैं तो उसका सर्विस चार्ज अलग होता है. एयरलाइन में चेक्ड या ओवरसाइज्ड बैगेज फीस, कैंसिलेशन फीस, अर्ली सीट सलेक्शन फीस, वाईफाई, फूड, बीवरेज और इंटरटेनमेंट फीस वसूला जाता है. इसी तरह रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज खाना परोसने या अन्य सेवा देने के लिए लिया जाता है. सर्विस चार्ज पूरे बिल का 10 परसेंट तक हो सकता है और यह पैसा रेस्टोरेंट या होटल के स्टाफ पर खर्च होता है.

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