संजय रॉक और उनके साथियों को क्यों हो रहा बार-बार मारने का प्रयास, पढिये पूरी कहानी | REWA NEWS


रीवा। जिला सत्र न्यायालय में पेशी पर आए बदमाश संजय द्विवेदी उर्फ रॉक और उसके मुख्य गवाह प्रशांत मेंटल पर बदमाशों ने सोमवार दोपहर ताबड़तोड़ फायरिंग कर शहर में सनसनी फैला दी। हालांकि इसमें कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। अलबत्ता पुलिस ने मौके से कारतूस के 16 खोखे बरामद किया है। चर्चा है कि करीब तीन  मिनट तक दोनों ओर से फायरिंग हुई, लेकिन दूसरे गुट से अभी तक कोई सामने नहीं आया। बहरहाल गोली लगने से मामूली रुप से घायल संजय और उसके साथी हिमांशु के बयान पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने नामचीन बदमाश स्मोंटी सिंह व 5 अन्य पर प्रकरण दर्ज किया है।

संजय द्विवेदी उर्फ रॉक पर हमले का यह दूसरा मामला है। इसके पहले न्यायालय परिसर में उस पर गोली दागी गई थी। आरोप है कि स्मोंटी सिंह द्वारा किराये का शूटर हायर कर न्यायालय परिसर में ही हत्या कराने का असफल प्रयास किया गया था। इस घटना में भी स्मोंटी सिंह व उसके साथियों का नाम आया है। फिलहाल पुलिस घटना के तमाम पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।

सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक अरूण सोनी ने बताया कि दोपहर बाद करीब चार बजे बदमाश संजय द्विवेदी उर्फ रॉक, हिमांशु मिश्रा, राहुल सिंह बीबीए, अंकित उर्फ गजक बहादुर सिंह और प्रशांत तिवारी मेंटल न्यायालय में पेशी देने के बाद निकल कर जा रहे थे। बताया गया है कि कुछ काम से संजय रॉक और उसके साथी आकृति टॉकीज मोड़ टाटा मोटर्स के सामने पहुंचे। जैसे ही क्रेटा गाड़ी से रॉक और उसके दो साथी बाहर निकले। अचानक पल्सर बाइक में सवार होकर आए अज्ञात युवकों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। नेशनल हाइवे के किनारे दिन दहाड़े फायरिंग से पूरा इलाका दहल उठा। आसपास अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग में संजय रॉक और उसका साथी हिमांशु मिश्रा को मामूली चोंटें आई हैं। बताया गया है कि रॉक के दोनों हाथों में गोली लगी है। जबकि हिमांशु के बाये हाथ के कोहनी के नीचे और दाये हाथ की हथेली में गोली लगी है। दोनों को बाद में उसके साथियों द्वारा एसजीएमएच पहुंचाया गया।

स्मोंटी सिंह और उसके साथियों पर आरोप
पुलिस को दिये बयान में संजय द्विवेदी रॉक और उसके साथी हिमांशु मिश्रा ने स्मोंटी सिंह, पप्पू यादव, भानू सिंह, पिन्टू सिंह, विकास सिंह टेम्पो, स्मोंटी के छोटे भाई विकास सिंह पर हमला करने का आरोप लगाया है। फिलहाल इनके बयान के आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने उपरोक्त आरोपियों के विरूद्ध धारा 307 एवं 25, 27 आर्म्स एक्ट का प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की पता साजी में सरगर्मी से लग गई है। खबर लिखे जाने तक कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ था।

अस्पताल पहुंचे प्रभारी पुलिस अधीक्षक
घटना की सूचना पाकर प्रभारी पुलिस अधीक्षक आईपीएस आशुतोष गुप्ता, सिविल लाइन थाना ्रप्रभारी अरूण सोनी समेत पुलिस बल मौके पर पहुंच गये। श्री गुप्ता के निर्देश पर उपचाररत दोनों घायलों से बयान लिये गये और प्रकरण दर्ज किया गया। इसके अलावा एफएसएल के डॉ. आरपी शुक्ला व उनकी टीम ने भी अस्पताल पहुंच जांच पड़ताल की है।

दूसरी बार हुआ हमला
संजय द्विवेदी रॉक पर जानलेवा हमले का यह दूसरा मामला है। इसके पहले न्यायालय में पेशी के दौरान भाड़े के शूटरों ने फायरिंग की थी। जिसमें रॉक बाल-बाल बच गया। इस मामले मेें वहां मौजूद वकीलों ने दो युवकों को गिरफ्तार किया था। जिनका संबंध यूपी के इलाहाबाद से था। इस बार के हमले में भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि भाड़े के शूटर बुलाये गये थे। सिविल लाइन पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया है कि फरार बदमाशों में से एक हाथ में गोली लगी है।

दोनों तरफ से हुई फायरिंग
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया है कि मौके पर दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई है। करीब तीन मिनट तक गोली बारी के बाद आरोपी बाइक में सवार होकर भाग गये। हालांकि सिविल लाइन पुलिस ने दोनों तरफ से फायरिंग होने का कोई प्रमाण नहीं होने की बात कही है। साथ ही यह हवाला दिया है कि दूसरे पक्ष से कोई सामने नहीं आया है। लिहाजा क्रास फायरिंग जैसी वारदात समझ से परे है। घटना स्थल पर ताबड़तोड़ फायरिंग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल हाइवे में लगे डिवाइडर के समीप रखे पुलिस के स्टापर को गोली पार कर बाहर निकल गई है। यही नहीं वहां मौजूद एक पेड़ की डाल एवं समीप रखी हनुमान जी की प्रतिमा में भी गोली लगने के निशान पाये गये हैं।

गवाह को मारने की थी योजना
घटना के वक्त संजय द्विवेदी रॉक के साथ मौजूद प्रशांत तिवारी मेंटल ने बताया कि आरोपी उसे मारने आये थे। दरअसल स्मोंटी सिंह  व उसके साथियों के विरूद्ध न्यायालय में हमला के मामले में प्रशांत मेंटल प्रमुख गवाह है। माना जा रहा है कि गवाह को मारने के लिए योजना थी। लेकिन बीच में हिमांशु नामक युवक आ गया। जिससे आरोपियों का निशाना चूक गया। प्रशांत मेंटल की मानें तो उसने खुद को कार की सीट के नीचे छिपाकर जान बचाई है। प्रशांत मेंटल के इस बयान में कितना दम यह तो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आयेगा। 

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