कर्नाटक चुनाव के बाद MP में अब इस फॉर्मूले को लागू करेगी भाजपा | MP NEWS


भोपाल. कर्नाटक में भाजपा की जीत का रास्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की माइक्रो लेवल पर रची गई रणनीति के जरिए पूरा हुआ है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा रहा, हॉफ पेज प्रभारी। पार्टी अब इस फॉर्मूले को मध्यप्रदेश में भी लागू करने जा रही है।
अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रदेश के सभी पोलिंग बूथों पर निर्वाचन सूची के हर पेज पर दो प्रभारियों को तैनात करेगी। इस लिहाज से पेज के आधे एक प्रभारी के पास होंगे। कर्नाटक में भाजपा ने तकरीबन ३० लाख हॉफ पेज प्रभारियों को मैदान में उतारा था।

- ये है हॉफ पेज प्रभारी का गणित
एक बूथ पर लगभग १००० वोटर होते हैं। एक बूथ की पोलिंग लिस्ट में लगभग ३० पेज होते हैं। इस लिहाज से एक पेज पर लगभग ३०० वोटरों के नाम होते हैं। हॉफ पेज प्रभारी बनाए जाने से एक प्रभारी के हिस्से में लगभग डेढ़ सौ वोटर आएंगे। इन प्रभारियों को अभी से अपने मतदाताओं के संपर्क में रहना है।

इसमें उन लोगों पर खास तौर पर टारगेट करना है, जो भाजपा के परंपरागत रूप से वोटर नहीं रहे हैं। हॉफ पेज प्रभारियों की भूमिका चुनाव के वक्त सबसे अहम होगी। उन्हें अपने हिस्से के मतदाताओं को घर से निकाल कर पोङ्क्षलग बूथ तक पहुंचाने में मशक्कत करना होगी। मध्यप्रदेश में ६५२०० पोलिंग बूथ है। पूरे प्रदेश में हॉफ पेज प्रभारियों का आंकड़ा ३० लाख से ज्यादा पहुंच सकता है। पार्टी इतनी बड़ी टीम की तैनाती के लिए जून से ही मशक्कत शुरू करने जा रही है।

- ठाकरे का विचार, शाह की सफलता का राज
पन्ना प्रभारी की तैनाती करना मूल रूप से वरिष्ठ भाजपा नेता कुशाभाऊ ठाकरे का विचार था। १९९८ में उन्होंने यह रणनीति मध्यप्रदेश के चुनाव में लागू की थी। उसके बाद २०१४ के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने उत्तरप्रदेश के प्रभारी रहते वहां इस फार्मूले को लागू किया और ८० में से ७३ सीटें जीती। उसके बाद उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की सफलता में पन्ना प्रभारी की अहम भूमिका रही। कर्नाटक में इसे और माइक्रो लेवल पर लाते हुए हॉफ पेज प्रभारी तक कर दिया गया।




२०१८ विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा बूथ स्तर पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। पहले हम जितने कार्यकर्ता बूथ पर प्रचार और प्रबंधन के लिए लगाते थे उससे ज्यादा २०१८ में लगाएंगे। स्वाभाविक रूप से मतदाता सूची के हर पन्ने के मतदाताओं के जीवंत संपर्क के लिए इस बार ज्यादा प्रभारी तैनात किए जाएंगे।
- डॉ. दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता, भाजपा


चुनाव के लिए कमलनाथ का एक्शन प्लान तैयार
प्रदेश कांग्रेस के मुखिया कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव के लिए अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान के आधार पर ही आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। कमलनाथ संगठनात्मक रूप से उन कमियों पर फोकस कर रहे हैं, जो १५ साल से चली आ रही हैं। इन पर बिंदुवार काम किया जा रहा है। युवाओं को चुनाव और वरिष्ठों को संगठन में जिम्मेदारी देने की भी तैयारी की जा रही है। कमलनाथ जल्द ही अपनी टीम भी घोषित करने वाले हैं।


- दो स्तर पर सर्वे शुरू
उम्मीदवारों के लिए दो स्तर पर सर्वे किया जा रहा है। एक पीसीसी तो दूसरा सर्वे राहुल गांधी करवा रहे हैं। सर्वे का काम पूरा होते ही उम्मीदवारों का एेलान कर दिया जाएगा। कांग्रेस की कोशिश है कि अगले तीन महीने में सर्वे का काम पूरा हो जाए, ताकि वक्त रहते उम्मीदवारों की घोषणा की जा सके।


- १७ जिलों पर खास फोकस
कमलनाथ १७ जिलों पर खास फोकस कर रहे हैं। ये वो जिले हैं, जिनमें २०१३ में कांग्रेस एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी। इन जिलों की जिम्मेदारी विधायकों को सौंपी जा रही है, ताकि वहां के आम लोगों और कार्यकर्ताओं का फीडबैक लेकर रणनीति तैयार की जा सके। इन जिलों में मुरैना, दतिया, उमरिया, नरसिंहपुर, बैतूल, होशंगाबाद, रायसेन, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, झाबुआ, अलीराजपुर, उज्जैन, नीमच, आगर और रतलाम शामिल हैं।


- वोट प्रतिशत बढ़ाने का टारगेट
कमलनाथ ने युवक कांग्रेस, महिला कांग्रेस, किसान कांग्रेस, एनएसयूआइ और सेवादल की बैठक लेकर अपने-अपने तबके में वोट प्रतिशत बढ़ाने का टारगेट दिया है। कर्नाटक में बराबर वोट प्रतिशत होने के बाद भी कांग्रेस सीट जीतने के मामले में भाजपा से बहुत पीछे रह गई,

इससे सबक लेते हुए कांग्रेस यहां ज्यादा से ज्यादा वोट प्रतिशत बढ़ाना चाहती है। २०१३ में भाजपा को ४४.८७ फीसदी वोट मिले थे जबकि कांग्रेस ३६.३८ फीसदी वोट से पीछे रह गई है। २००८ में भाजपा और कांग्रेस को लगभग बराबर वोट मिले थे फिर भी कांग्रेस चुनाव हार गई थी। भाजपा को ३६.८१ तो कांग्रेस को ३६.०४ फीसदी वोट प्राप्त हुए थे।



कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए ही तैयारी कर रही है, कमियों को दूर किया जा रहा है, रणनीति के तहत ही काम किया जा रहा है।
कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

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