रीवा के युवक ने लिया फर्जी दस्तावेजों के जरिए 65 करोड़ का लोन, सीबीआई ने कसा शिकंजा || CRIME NEWS


दिल्ली की सीबीआई एएसपी की अगुवाई में टीम ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित 50 लोगों के दर्ज किए बयान


फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोन लेकर घोटाला करने वालों पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच के लिए दिल्ली से शहर पहुंची सीबीआई की टीम ने घोटाले से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है।


जबलपुर । सिविल लाइंस स्थित केनरा बैंक की शाखा से जुड़े 65 करोड़ घोटाले मामले में सीबीआई का शिकंजा और कस गया है। दिल्ली सीबीआई में एएसपी संदीप कुमार शर्मा की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ने घोटाले से जुड़े तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ऋण लेने वाली फर्म के प्रोपराइटर, उससे जुड़े पुराने कर्मचारी और 50 के लगभग उन लोगों के बयान दर्ज किए, जिनके नाम पर कर्ज लिए गए थे। टीम पूछताछ कर मंगलवार को दिल्ली लौट गई है। 15 दिन बाद यह टीम फिर आकर आगे की कार्रवाई करेगी। 

ऐसे किया था घोटाला 
केनरा बैंक से वर्ष 2015-16 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक केडी दुबे ने निजी फर्म जगदम्बा एएम डब्ल्यू मोटिवेटिव प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर पुष्पेंद्र सिंह से मिलीभगत कर 50 लोगों के नाम से विभिन्न वाहन आदि की खरीदी का लोन को मंजूरी कर बंदरबांट कर लिया। पुष्पेंद्र सिंह रीवा का रहने वाला है। ये रकम 65 करोड़ रुपए के लगभग है। कटनी डीडीकांड का मामला सामने आने के दौरान छानबीन में यह घोटाला भी सामने आया। कटनी डीडीकांड में भी पुष्पेंद्र सिंह ही मास्टरमाइंड था। बैंक के ऑडिट में 65 करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद बैंक की तरफ से दिल्ली सीबीआई में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले में दिल्ली की सीबीआई इसके 9 अप्रैल 2017 को पूर्व जबलपुर, रीवा और सतना में दबिश दी थी। 

चार दिन रही टीम 
सीबीआई दिल्ली की टीम चार दिन पहले शहर पहुंची थी। टीम ने तत्कालीन शाखा प्रंबंधक केडी दुबे, प्रोपराइटर पुष्पेंद्र सिंह, उनके फर्म के पुराने कर्मचारी और लोन स्वीकृत होने वाले ग्राहकों के बयान दर्ज किए गए। वहीं लोन स्वीकृत कराने के लिए लगाए गए दस्तावेजों को भी जप्त किया। घोटाले की रकम पांच करोड़ से अधिक होने की वजह से दिल्ली सीबीआई मामले की जांच कर रही है।

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