11 वर्षीय मासूम से दुराचार के बाद हत्या, मध्यप्रदेश HC ने लगाई फांसी की सजा पर मुहर

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 11 वर्षीय मासूम के साथ सामूहिक दुराचार के बाद हत्या के मामले में डिंडौरी निवासी भवानी मरकाम ओर सतीश धूमकेती को सेशन कोर्ट से सुनाई गई फांसी की सजा पर मुहर लगा दी।
प्रशासनिक न्यायाधीश एसके सेठ व जस्टिस नंदिता दुबे ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने जघन्य कृत्य के लिए फासी से कम सजा हो ही नहीं सकती। पहले मासूम बच्ची से सामूहिक दुराचार के जरिए न केवल उसके शरीर बल्कि आत्मा तक को आहत किया गया इसके बाद जिन्दगी छीन ली गई। ऐसे दुष्कर्मियों को इस दुनिया में जीने का कोई हक नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अक्षय नामदेव ने अपील का विरोध किया और सेशन कोर्ट की उस फैसले पर मुहर लगाए जाने पर बल दिया, जिसमें कहा गया था कि डिंडौरी निवासी भवानी मरकाम ओर सतीश धूमकेती को गले में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए जब तक कि मृत्यु न हो जाए।
दरअसल, इन दोनों हैवानों ने कृत्य ही ऐसा किया है जिसके लिए मृत्युदंड ही उपयुक्त है। ऐसे दरिंदों को समाज के बीच खुला छोड़ना खतरनाक हो सकता है। इनके प्रति दया बरतकर मृत्युदंड की सजा को कम कर उम्रकैद में तब्दील करने की रियायत बरतने का भी सवाल नहीं उठता क्योंकि मामला रेयर और रेयरेस्ट की परिधि में आता है।
क्या था मामला
अभियोजन के मुताबिक 14 अप्रैल 2017 को रात्रि 11 बजे से 15 अप्रैल 2017 को सुबह करीब 5 बजे के बीच ग्राम गुडियारी में 11 वर्ष की मासूम का अपहरण करने के बाद सामूहिक दुराचार किया गया, इसके बाद अपने जुर्म पर पर्दा डालने की नीयत से नृशंस हत्या कर दी गई।
पुलिस ने डिंडौरी निवासी भवानी मरकाम ओर सतीश धूमकेती के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने के बाद अदालत में चालान पेश किया। ट्रायल के बाद सेशन कोर्ट ने 2 नवंबर 2017 को दोनों को फांसी की सजा सुना दी थी। जिसे कंफर्म करने हाईकोर्ट भेजा गया। लिहाजा, हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई पूरी करने के साथ सजा पर मुहर लगा दी।

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