रीवा संभाग के हजारों गाँवों पर बाढ़ का खतरा, विन्ध्य के महासागर में आ सकता है भूकंप || VINDHYA NEWS


रीवा | दो दिन पूर्व सिंगरौली में आए भूकम्प के बाद बाणसागर बांध की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भूकम्प से बांध पर क्या असर पड़ रहा है इस बात से अनजान सरकारी तंत्र केन्द्र सरकार द्वारा वर्षो पूर्व स्वीकृत 8 करोड़ के भूकम्प मापी यंत्र पर चुप्पी साध ली है। लगभग 65 अरब की लागत से तैयार बाणसागर बांध से अब तक अकेले मध्य प्रदेश को 63 अरब रुपए का राजस्व मिल चुका है। बावजूद इसके उसकी देखरेख में अधिकारी खामोश है।  

नहीं लगे सीसमोग्राफी यंत्र, न बढ़ाई गई सुरक्षा
विंध्य का महासागर कहे जाने वाला बांध का क्षेत्रफल 584 वर्ग किलोमीटर है। भूकम्प से होने वाली हल्की सी क्षति हजारों गांवों में तबाही मचा सकती है। सीसमो ग्राफी यंत्र न लगने की वजह से यह जानकारी जुटा पाना संभव नहीं है कि भूकम्प की तीव्रता बाणसागर के आसपास कितनी रही है। ऐसे में केन्द्रीय जल आयोग ने बांध में पांच सीसमोग्राफी यंत्र लगाने की स्वीकृति दी थी। लेकिन विभाग की लापरवाही की वजह से यह अभी तक नहीं लग पाये हैं। 

बताया गया है कि मुख्य बांध में तीन एवं रिजर्व वायर में दो सीसमोग्राफी लगाये जाने थे। सिंगरौली में आये भूकम्प के झटके के बाद एक बार फिर से सीसमोग्राफी पर चर्चा आम हो गई है। महाकौशल क्षेत्र को भूकम्प के लिहाजा से संवेदनशील माना जा रहा है। क्षेत्र में सीसमोग्राफी यंत्र लगने के बाद यह जाना जा सकेगा कि भूकम्प का असर बांध पर क्या है। 

लागत से ज्यादा मिला राजस्व
बाणसागर बांध परियोजना में किए गए व्यय से कहीं ज्यादा राजस्व की आय भले ही मध्य प्रदेश शासन को मिल चुकी है परन्तु उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर अब तक अनदेखी की जा रही है। जल विद्युत, सिंचाई एवं अनाज उत्पादन के अलावा भी पेयजल, मछली उत्पादन तथा औद्योगिक जलकर से राजस्व मिले हैं। बाणसागर बांध से यह पूरा क्षेत्र अंतर्राज्जीय महत्व का विकास बन गया।

भारत शासन द्वारा दस वर्ष पूर्व भूकम्प मापी यंत्र के लिए 8 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं परन्तु विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से बाणसागर बांध में अब तक सीसमो ग्राफी यंत्र नहीं लगाये जा सके हैं। लिहाजा विंध्य क्षेत्र के विभिन्न भागों में अब तक आने वाले भूकम्प से बांध पर क्या असर पड़ा है यह नहीं मालुम हो सकता है। बताया गया है कि बाणसागर बांध में 5 भूकम्प मापी यंत्र लगाये जाने थे। जिसके लिए शासन ने राशि पूर्व से ही स्वीकृत कर रखी है। 

भू गर्भीय हलचलों की जानकारी जरूरी
भूकम्प के अलावा भी पृथ्वी के अंदर कई तरह की हलचलें लगातार होती रहती है। यही वजह है कि बाणसागर बांध में ऐसे यंत्र जो पानी के वजन एवं हवा के दबाव तथा बांध के टम्परेचर की जानकारी ली जा सकती है। बाणसागर बांध से जुड़े अधिकारियों की मानें तो भूगर्भीय हलचलों से बांध में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। इसके लिए प्लंबलाइन एसेम्बली लगाई गई है। जो बांध के झुकाव को बताती है। सूत्रों की मानें तो इन यंत्रों की मानीटरिंग न किए जाने से यह पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है कि वर्तमान में बांध किस स्थिति में है। 

इन यंत्रों की भी स्वीकृति
बाणसागर बांध में सीसमोग्राफी यंत्र के अलावा भी कई ऐसे उपकरण लगाये जाने थे जिसके द्वारा बांध में होने वाली हरकत का पता लगाया जा सके। बताया गया है कि तत्कालीन सीई शेर बहादुर सिंह ने शासन को जो प्रपोजल भेजा था उसकी स्वीकृति काफी पहले मिल गई थी। लिहाजा अब तक इन यंत्रों को बांध में नहीं लगाया जा सका। प्रेशर, टम्परेचर, ट्रेस, पे्रबलाइन, पोरप्रेशर ब्लक जैसे यंत्र से बांध के किसी हिस्से में होने वाले हलचल की जानकारी ली सकती थी

ताज्जुब की बात यह है कि विंध्य की प्राण कहे जाने वाले बाणसागर बांध की विभागीय अधिकारियों ने अनदेखी कर बड़ी गलती की है। हलांकि जानकारों द्वारा बताया गया है कि किसी भी भूकम्प एवं पृथ्वी में होने वाली एक्टिविटी का ज्यादा असर बांध पर नहीं होगा। परन्तु सुरक्षा के मद्देनजर इन यंत्रों का होना बेहद जरूरी है।

तैनात नहीं सीआईएसएफ 
बाणसागर बांध की सुरक्षा के मद्देनजर केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के तैनाती की स्वीकृति मिल जाने के बाद भी आज तक सीआईएसएफ के जवान तैनात नहीं किए जा सके है। जबकि नक्सली मूवमेन्ट के चलते बाणसागर बांध की सुरक्षा के लिए शासन ने इसकी स्वीकृति दे दी थी। परन्तु यह बल तैनात न किए जाने से बांध पर लगातार खतरा बना रहता है।

548 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले बांध में किसी भी तरफ से हरकत की जा सकती है। इसके लिए बल की तैनाती आवश्यक है। ताज्जुब की बात यह है कि विंध्य क्षेत्र के महासागर कहे जाने वाले इस बांध की सुरक्षा पर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है। जबकि इस बांध के नीचे हजारों गांव आबाद है।

इस तरह की अगर कोई हरकत के बांध को खतरा होता है तो उन गांवों का क्या होगा यह सोचकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक दशक में बांध से इतना राजस्व मिल चुका है जितना की उसमें व्यय किया जा चुका है। बल्कि यह कहा जा सकता है कि अकेले मध्य प्रदेश को 63 अरब का विभिन्न स्त्रोतों से फायदा हुआ है। 

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