रीवा के संजय गाँधी अस्पताल के OPD में खुलेगा प्रदेश का तीसरा वायरलाजी लैब || REWA NEWS

रीवा | संजय गांधी अस्पताल के ओपीडी में प्रदेश का तीसरा वायरलाजी लैब खुलेगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने 1 करोड़ 82 लाख रुपए की राशि स्वीकृति कर श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के खाते में जारी कर दी है। अप्रैल माह में ही एसजीएमएच के ओपीडी के ऊपर हिस्से में यह लैब खोला जाएगा। खासबात यह है कि इन्दौर एवं भोपाल के बाद रीवा में खुलने वाला यह प्रदेश का तीसरा लैब होगा।

संजय गांधी अस्पताल को अब एक नई सौगात मिलने जा रही है। यूजी हॉस्टल के पीछे वायरलाजी लैब बनाए जाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। जल्द ही बनने वाले भवन का टेन्डर निकालकर कार्य शुरू किए जायेगा। हालांकि लैब के लिए शासन द्वारा पूर्व से ही श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के खाते में 1 करोड़ 89 लाख रुपए आ गये थे परन्तु भूमि न मिल पाने की वजह से यह काम रूका हुआ था। अस्पताल प्रबंधन ने हॉस्टल के पीछे की जमीन को चिन्हित कर वहां पर वायरलाजी लैब बनाने का निर्णय लिया है। 

गौरतलब है कि संजय गांधी अस्पताल में कई ऐसी जांचें नहीं हो पा रही थी जिनके सेम्पल जबलपुर सहित अन्य स्थानों के लिए भेजे जा रहे थे। वायरलाजी लैब बन जाने के बाद अब यहां पर ऐसी जांचें हो सकेगी जिसके लिए मरीज को एक हफ्ते तक का इंतजार करना पड़ता था। बताया गया है कि वायरलाबी लैब में हेपेटाइटिस, ब्रेन फीवर चेचक, खसरा, रैबीज, पोलिया, डेंगू जैसी बीमारियों की जांच की जा सकेगी। अभी यह जांचें यहां पर नहीं हो रही थी।

क्या है वायरलाजी लैब

वायरलाजी लैब आधुनिकतम परीक्षण, आणविक विधियों व सीरम विज्ञान प्रदर्शन सेवा विषाणु विज्ञान प्रयोगशाला है। विषाणु में लगातार स्वभाव व प्रक्रिया का अंतर आता है। इसी के आधार पर व्यक्ति के शरीर पर बीमारी का प्रभाव होता है। वायरलाजी लैब लगातार मौजूदा घटनाक्रम के बराबर पूरी नजर रखने के साथ मरीजों को बेहतरीन सेवाए प्रदान करने का सटीक व बैज्ञानिक तरीका है। यह प्रयोगशाला हेपेटाइटिस वायरस की पूरी श्रृंखला के लिए वायरल बीमारियो का पता लगाने और निगरानी के लिए नैदानिक सेवाए प्रदान करती है। इस लैब से चेचक दाग वायरस यानी एचएसवी का भी पता लगाया जाएगा। इसके अलावा इसमें डीएनए क्लोनिंग के लिए अनुक्रमण  वंशानुगत बीमारियों की पहचान आदि की जाएगी। 

इन्दौर एवं भोपाल में है लैब 

वायरस से फैलने वाली गंभीर बीमारियों की जांच के लिए अभी तक प्रदेश में इन्दौर एवं भोपाल में वायरलाजी लैब खुला है। संजय गांधी अस्पताल में भर्ती मरीजों की बीमारी का पता लगाने के लिए भले ही माइक्रोबायोलाजी का सहारा लिया जाता है परन्तु वायरस से फैलने वाली सभी तरह की बीमारियों की जानकारी मात्र वायरलाजी लैब से ही मिल पाती है। ऐसे में यहां पर यह लैब न होने से कलेक्शन भोपाल एवं इन्दौर भेजा जाता है जो कई दिनों बाद रिपोर्ट भेजी जाती थी। ऐसे में मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पाता और उनकी इलाज के अभाव में मौत हो जाती है।

वायरस से फैलने वाली गंभीर बीमारियों की जांच के लिए वायरलाजी लैब खोला जाएगा। जिसके लिए शासन द्वारा 1 करोड़ 82 लाख की राशि दी गई है। यह लैब खुल जाने से हेपेटाइटिस, मैनेन्जाइटिस, ब्रेन फीवर, चेचक आदि की जांच हो सकेगी। अभी तक इस तरह का लैब भोपाल एवं इन्दौर में है। रीवा में यह प्रदेश का तीसरा लैब होगा।
डॉ. एसके मिश्रा, ब्लड बैंक प्रभारी रीवा

No comments

Powered by Blogger.