करोड़ों के फर्जी बिल पास करने रीवा DEO पर दबाव, विधायक और आयुक्त कार्यालय भोपाल पर आरोप || REWA NEWS

रीवा. स्कूल शिक्षा विभाग में एक बड़े फर्जीवाड़ा का भंडाफोड़ हुआ है। मामला बिल से जुड़ा है, डीईओ ने करीब 1.40 करोड़ का फर्जी बिल पास करने पर रोक लगा दी है। लगाए गए बिल को पास कराने के लिए हालांकि विधायक से लेकर भोपाल लोक शिक्षण तक से फोन पहुंचे, लेकिन डीईओ ने बिल पास करने से इंकार कर दिया। इस पूरे फर्जीवाड़े में विभाग के एक लिपिक की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी शिकायत सीईओ जिला पंचायत से की गई है। 

मिली जानकारी के अनुसार 31 मार्च बजट लैप्स होने का अंतिम दिन है। सरकारी विभागों के करोड़ों के बजट लैप्स हुए हैं। बजट लैप्स होने से बचाने के लिए अंतिम समय में विभागों से करोड़ों के बिल लगे। इन बिलों में कुछ सही और बहुत फर्जी थे। स्कूल शिक्षा विभाग में भी लैप्स हो रहे बजट पर हाथ साफ करने की तैयारी थी। डीईओ कार्यालय में पदस्थ लेखापाल अशोक शर्मा ने भी 1.40 करोड़ का बिल तैयार किया था। बिल को अंतिम समय में पास कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी अंजनी तिवारी के पास प्रस्तुत की गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने बिल में लगे कार्यों और खरीदी की जांच रमसा प्रभारी पीएल मिश्रा से कराई। जांच में सभी बिल फर्जी निकले। एक करोड़ चालीस लाख का बिल बिना किसी काम के लेखापाल शासन के खाते से निकलवाने की फिराक में था। इस चोरी को पकडऩे के बाद डीईओ ने बिल पास करने से ही इंकार कर दिया। बिल रुकने से नाराज लेखापाल ने आयुत कार्यालय लोक शिक्षण और स्थानीय विधायक तक बात पहुंचाई। डीईओ के पास दोनों जगहों से फोन पहुंचा और बिल पास करने का दबाव बनाया गया। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी ने दबाव के बाद भी बिल पास करने से इंकार कर दिया। सूत्रों की मानें तो डीईओ ने बिल जबरन पास कराने की शिकायत जिला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल से की है। लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की शिकायत भी पहुंच गई है। 

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