बड़ी खबर : इस कांग्रेसी नेता का हुआ निधन, प्रदेश भर में शोक की लहर | MP NEWS


भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह का भोपाल में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। इससे पहले कि उन्हें कोई चिकित्सा मिल पाती दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। इधर, सिंह के निधन का समाचार मिलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर दौड गई। कांग्रेस, भाजपा समेत समाजसेवियों ने भी उनके निधन पर श्रद्धांजलि दी है। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को ग्वालियर में किया जाएगा।
भाजपा बोली- शीतल छांव देने वाला वृक्ष उखड़ गया
ऐसे एक वृक्ष का उखड़ जाना जो सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को शीतल छांव देता रहा। ऐसी नदी का अचानक विलुप्त हो जाना जिसमें डुबकी लगाकर लोग अपने आप को धन्य मानते हो।
ग्वालियर की राजनीति में वे अजातशत्रु पीढ़ी के शायद अंतिम संवाहक थे। एक ऐसी पीढ़ी के प्रतिनिधि ने आज रात अंतिम सांस ली है, जिनका स्पर्श माता और पिता दोनों के स्नेह की अनुभूति कराता था।
मुझे याद नहीं कि कभी बहुत लंबा समय बीत पाया हो और आदरणीय बाबूजी का संदेशा न मिला हो। उन्हें मुझसे सदैव यही शिकायत रहती थी कि तुम बहुत दिनों से नहीं आए। जब भी गया तब कोई राजनीतिक चर्चा नहीं की, पत्रकारिता में क्या चल रहा है यह भी कभी नहीं पूछा। केवल घर परिवार और मेरे व्यक्तिगत जीवन की दिशा पर ही चर्चा करते थे। पारिवारिक संबंधों में वे औपचारिकता नहीं करते थे, प्रगाढ़ता से उन्हें निभाते थे।
मुझे याद है 3 वर्ष पूर्व मेरी पूज्य माताजी के निधन पर 84 वर्ष की उम्र होने के बावजूद आदरणीय बाबूजी मेरे गांव 13 दिन के भीतर दो बार पहुंचे और घंटों बैठकर ढांढस बांधते रहे। यह मेरे जैसे व्यक्ति के लिए कभी भी विस्मृत न कर पाने वाले क्षण थे। शायद ही उनका ऐसा कोई परिचित मिलेगा, जिसके सुख और दुःख में आदरणीय राजेंद्र सिंह जी की उपस्थिति नहीं देखी गई हो।
पत्रकारिता के क्षेत्र से जब मुझे राजनीतिक क्षेत्र में आने की परिस्थितियां बनी तब उन्होंने मुझे बैठाकर लगभग एक घंटा बाद की और राजनीति में व्यक्तिगत आस्थाओं से बचकर सिर्फ विचार के लिए काम करने का मार्गदर्शन किया।
यद्यपि राजेंद्र सिंह जी राजनीति के प्रारंभ काल से अंतिम सांस लेने तक कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे, लेकिन दूसरी विचारधाराओं के प्रति उनके मन में कभी अनादर या उपेक्षा का भाव नहीं रहा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चलने वाले सरस्वती शिशु मंदिरों को वे बेहद आदर और श्रद्धा के साथ देखा करते थे।
उन्होंने मुझे कई बार कहा कि इन विद्यालयों से निकलने वाले छात्रों के संस्कार अलग ही दिखाई देते हैं, इसलिए इनका संवर्द्धन बहुत आवश्यक है।
आज भोपाल में जब तड़के खबर मिली कि आदरणीय बाबूजी नहीं रहे, तो मैं भी ओल्ड MLA क्वार्टर की ओर दौड़ पड़ा। दृश्य देखकर स्तब्ध रह गया। वह चिरनिद्रा में थे, लेकिन जब उनके पास गया तो मुझे लगा अभी उठकर मुझे फिर कुछ कहने वाले हैं।
लेकिन, विधाता का अपना विधान है, उसके आगे सभी बेबस हैं, असहाय हैं, आज उनकी पार्थिव देह उनके पुत्र अशोक सिंह भोपाल से लेकर ग्वालियर के लिए रवाना हो गए।
कल ग्वालियर में होगा अंतिम संस्कार
मंगलवार सुब 9:00 बजे वे पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे, लेकिन मुझे विश्वास है कि उनकी प्रेरणा, उनका स्नेह उनकी शीतल छांव कई पीढ़ियों तक ग्वालियर अंचल के लोगों के बीच जीवंत रहेगी।
उनके श्री चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं
(लोकेंद्र पाराशर, लेखक मध्यप्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी हैं)

प्रदेशभर में शोक की लहर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह का रविवार देर रात को भोपाल में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। इससे पहले कि उन्हें कोई चिकित्सा मिल पाती दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को ग्वालियर में किया जाएगा।
-प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं उनके पुत्र अशोक सिंह के मुताबिक सिंह वर्ष 1975 से 1977 के बीच मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे।
-1972 में पहली बार मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य बने।
-पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने निकट सहयोगी राजेन्द्र सिंह के निधन पर दुख व्यक्त किया और उन्हें अपना करीबी मित्र बताया।
-विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी राजेन्द्र सिंह के निधन पर गहरा दुख: व्यक्त किया है

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