रीवा की खूनी सड़कें : हादसों से अब लिया सबक, FLYOVER को किया 2 लेन || REWA NEWS


रीवा. शहर की चरमराई यातायात व्यवस्था और वाहन चालकों की लापरवाही हादसों की मु य वजह बन रही है। एक ओर जहां हादसों के बाद पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास करती है, वहीं दूसरी ओर वाहन चालक भी हादसे के बाद ही कम र तार से चलने और यातायात नियमों का पालन करने की सीख लेते हंै। अगर पुलिस और वाहन चालक अपने- अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करंे तो दुर्घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आएगी। 

बता दें पुलिस और वाहन चालकों की लापरवाही के चलते जिले में तीन माह के भीतर 348 हादसे हुये, जिनमें से 267 लोगों को गंभीर चोटें आईं और 90 लोग काल के गाल में समा गए। सड़क हादसों में ज्यादा मौतें फरवरी माह में हुईं, जिनमें मृतकों की सं या 40 बताई गई है। 

गौरतलब है कि मंगलवार दोपहर सिरमौर चौराहा लाईओवर पर जीप और बाइक की बीच हुई जोरदार भिडं़त में दो छात्र आज भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ कर रहे हंै। उक्त घटना के बाद पुलिस ने सबक लेते हुए लाईओवर को टू लेन बना दिया है। ज्ञात हो कि लाईओवर में पूर्व में भी सड़क हादसे हुये थे, लेकिन पुलिस नहीं चेत रही थी। मंगलवार को वीभत्स हादसे के बाद पुलिस जागी और लाईओवर पर होने वाले हादसों को रोकने के लिये नई व्यवस्था बना दी गई। पुलिस की इस गंभीरता से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर की यातायात पुलिस व्यवस्था दुरुस्त करने के लिये हादसों का इंतजार करती है। 

डीएसपी और एएसपी तक कर चुके हैं कवायद : 
यातायात व्यवस्था को सुधारने का जि मा उपनिरीक्षक से लेकर डीएसपी और एएसपी स्तर तक के अधिकारियों को सौंपा जा चुका है, लेकिन व्यवस्था जस की तस है। ज्ञात हो कि कड़ी कार्यवाही को लेकर चर्चित रहने वाले सूबेदार राहुल यादव और तत्कालीन डीएसपी मनोज शर्मा ने विगत तीन वर्षों तक शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिये कई प्रयोग किये। इसके बाद यातायात की कमान सूबेदार नृपेन्द्र सिंह को सौंपी गई, जिन्होंने दिनरात मेहनत की और अलग-अलग प्रयोग करते हुये मार्गों को परिवर्तित किया। लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। इसी तरह से एसएसपी आशुतोष गुप्ता ने भी यातायात सुधारने के लिये बसों के निकलने सहित ऑटो खड़ा करने और ठेला व्यापारियों के लिये जगह सुनिश्चित की, लेकिन यह कवायद कुछ दिनों में ही ठंडी हो गई। 

15 दिन में व्यवस्था सुधारने के दिए थे निर्देश : 
आईजी उमेश जोगा ने पदभार ग्रहण करते ही सबसे पहले 15 दिन के भीतर शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिये अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये थे। इसका जि मा आईपीएस एएसपी आशुतोष गुप्ता को सांैपा गया था। आईजी के निर्देश के बाद शुरुआती दिनों में पुलिस ने अभियान चलाकर शहर के कई मार्गों को एकांगी बना दिया। बस स्टैण्ड में बसों के प्रवेश और निकासी के लिये नई व्यवस्था बनाई गई। चौराहों में ऑटो के खड़े होने के लिये जगह निर्धारित की गई। ठेला व्यापारियों को सड़क की पटरी से दूर जगह सुनिश्चित की गई और सड़क पर बेतरतीब पार्क होने वाले वाहनों के लिये अण्डरलाइन बनाई गई। उक्त सारी कवायदें महज कुछ दिनों तक ही चलीं। अभियान ठंडा पड़ते ही सबकुछ ज्यों का त्यों हो गया। 

अव्यवस्था के ये हैं कारण : 
बीते दो सालों में परिवहन और पुलिस विभाग द्वारा दर्जनभर से ज्यादा बैठकें मात्र ऑटो के रूट निश्चित करने के लिये की गईं, लेकिन ये व्यवस्था बैठक तक ही सीमित रह गई। शहरी क्षेत्र में यूं तो करीब 5 हजार ऑटो पंजीकृत हैं, लेकिन संचालन दस हजार से ज्यादा का हो रहा है। संबंधित विभाग द्वारा इनके रूट भी निश्चित किये गए, लेकिन एक भी ऑटो अपने रूट पर संचालित नहीं हो रहे हैं।

सौ. दैनिक जागरण, रीवा

No comments

Powered by Blogger.