नर्मदा यात्रा के बाद दिग्विजय की SOCIAL MEDIA पर वापसी, 6 महीने बाद पहले TWEET में ये कहा



नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर वापसी हो गई है। 6 महीनों से ज्यादा तक सोशल मीडिया से दूर रहे दिग्विजय शनिवार को ट्विटर पर फिर आए। अपने ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। दिग्विजय ने ट्वीट किया, देश में आदिवासी, दलितों और पिछड़ों को पहली बार कानूनी हक 1950 में बाबा साहेब ने संविधान में दिए। उन्होंने लिखा सामाजिक और आर्थिक समानता ही भारतीय संविधान का लक्ष्य है और बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि है। 

दिग्विजय ने ट्विटर पर क्या लिखा?

जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के आशीर्वाद से और सभी मित्रों के सहयोग से मॉं नर्मदा की परिक्रमा निर्विघ्न पूर्ण हुई। मैं और अमृता कृतज्ञ हैं।

कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने 6 महीनों से ज्यादा समय के बाद ट्विटर पर वापसी की। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा 'जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के आशीर्वाद से और सभी मित्रों के सहयोग से मॉं नर्मदा की परिक्रमा निर्विघ्न पूर्ण हुई। मैं और अमृता कृतज्ञ हैं।'

बाबा साहेब की याद में कई ट्वीट


आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग को इतिहास में पहली बार क़ानूनी हक 1950 में संविधान ने दिए। 68 सालों में इस नींव पर जो जागरूकता-सशक्तिकरण संभव हुए, उसके चलते ये वर्ग अब बाबा साहब के सपने को साकार करने की स्थिति में पहुँच गए हैं।

दिग्विजय सिंह ने इसके बाद बाबा साहेब अंबेडकर की याद में कई ट्वीट किए। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा 'आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग को इतिहास में पहली बार क़ानूनी हक 1950 में संविधान ने दिए। 68 सालों में इस नींव पर जो जागरूकता-सशक्तिकरण संभव हुए, उसके चलते ये वर्ग अब बाबा साहब के सपने को साकार करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।'


इस संकेत को सभी उपेक्षा करने वाले लोगों को समझना चाहिए।
आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग की न्याय यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2002 का ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ था जिसे मैंने बतौर मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश में लागू किया था।


क़ानूनी समानता के साथ सामाजिक और आर्थिक समानता ही भारतीय संविधान का सच्चा लक्ष्य है और बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि है।

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा 'इस संकेत को सभी उपेक्षा करने वाले लोगों को समझना चाहिए। आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग की न्याय यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2002 का ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ था जिसे मैंने बतौर मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश में लागू किया था। कानूनी समानता के साथ सामाजिक और आर्थिक समानता ही भारतीय संविधान का सच्चा लक्ष्य है और बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि है।'

5 अक्टूबर को किया था आखिरी ट्वीट

दिग्विजय सिंह ने ट्वीटर पर अपना आखिरी ट्वीट 5 अक्टूबर 2017 को किया था और उसके बाद 14 अप्रैल 2018 को उन्होंने ट्वीट किया। अपने आखिरी ट्वीट में दिग्विजय ने एक खबर को शेयर किया था, जिसमें पत्रकार गौरी लंकेश को अन्ना पोल्तिकोवस्काया अवार्ड मिलने की जानकारी दी गई थी। इससे पहले उन्होंने 30 सिंतबर को ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने नर्मदा परिक्रमा यात्रा शुरू होने की जानकारी दी थी। इससे पहले तक दिग्विजय ट्वीटर पर काफी एक्टिव रहते थे और मोदी सरकार और बीजेपी को लगातार घेरते रहते थे।

आपत्तिजनक ट्वीट भी कर चुके हैं कई बार
दिग्विजय सिंह ट्वीटर पर कई बार ऐसे ट्वीट भी कर चुके हैं, जिनपर काफी बवाल मचा था। 8 सिंतबर 2017 को दिग्विजय ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री मोदी को लेकर काफी आपत्तिजनक ट्वीट किया था। दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक फोटो शेयर की, जिसमें पीएम मोदी को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी गई थी। इस फोटो में पीएम मोदी के सपोटर्स, जिन्हें आमतौर पर कांग्रेस 'भक्त' कहकर बुलाती हैं, उनको लेकर भी आपत्तिजनक बात लिखी हुई थी।  दिग्विजय सिंह ने एक फोटो शेयर की थी, जिसमें पीएम मोदी के 2 अचीवमेंट्स बताए गए थे। इस फोटो को शेयर करते हुए ये भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा कि, 'ये बेवकूफ बनाने की कला में माहिर है।' 

हाल ही नर्मदा यात्रा से लौटे हैं दिग्विजय
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की 'नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा' 9 अप्रैल को ही खत्म हुई है। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा की शुरुआत पिछले साल 30 सितंबर को नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से अपनी पत्नी अमृता राय के साथ शुरू किया था। दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी के साथ 192 दिन में 3300 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। इस दौरान उन्होंने रोजाना 20-25 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया।दिग्विजय सिंह ने अपनी यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश की करीब 120 विधानसभा सीटों को कवर किया। नर्मदा परिक्रमा यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह राजनीति से दूर ही रहे। हालांकि उन्होंने भी अपनी इस यात्रा को आध्यात्मिक और धार्मिक बताया था। यात्रा के दौरान दिग्विजय के साथ उनकी पत्नी अमृता और साधुओं-भक्तों की टोली ही चलती रही। इस दौरान उन्होंने राजनीति से जुड़े सवालों का भी जवाब भी नहीं दिया और जब उनसे कोई राजनीतिक सवाल पूछा भी गया तो वो सिर्फ 'हर-हर नर्मदे' कहकर चले जाते थे।

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