शिक्षकों के लिए CM ने दी बड़ी राहत, कहा: ई-अटेंडेंस जैसी अपमानजनक शर्तें लागू नहीं होने देंगे || MP NEWS


भोपाल/जबलपुर। स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई योजना ने अमल में आने से पहले ही दम तोड़ दिया। ई-अटेंडेंस की तैयारी पिछले तीन साल से की जा रही थी, लेकिन शिक्षकों के सख्त एतराज के बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और तीन साल की तैयारियों का अंत कुछ सेकंडों में कर दिया गया।
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के साथ ही अधिकारी, कर्मचारियों को समय पर स्कूल, दफ्तर पहुंचाने के लिए एम शिक्षा एप से ई-अटेंडेंस लगवाने करीब 3 साल से चल रही स्कूल शिक्षा विभाग की कवायद मुख्यमंत्री की एक घोषणा से ध्वस्त हो गई।
पहली बार 2 अप्रैल से शुरू हो रहे नए शिक्षण सत्र में 'शिक्षा' में गुणवत्ता लाने के लिए एक दिन पहले ही (शनिवार) को स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव दीप्ति गौड़ मुकर्जी ने वीडियो कान्फेसिंग के जरिए संयुक्त संचालक संभागीय लोकशिक्षण, जिला शिक्षा अधिकारियों को ई-अटेंडेंस का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए थे।
दूसरे ही दिन रविवार को सीएम ने 'चुनावी' साल को देखते हुए ऐसा स्ट्रोक मारा कि ई-अटेंडेंस की तैयारियां धरी की धरी रह गईं। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सीएम हाउस में कर्मचारियों के सम्मेलन में साफ कर दिया कि ई-अटेंडेंस अपमानजनक शर्तों में लागू नहीं होने देंगे। शिक्षक, कर्मचारियों का भी मान-सम्मान है। उनकी इज्जत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
एनआईसी ने की थी पूरी तैयारी-
  • स्मार्ट फोन से शिक्षकों की अटेंडेंस एम शिक्षा मित्र एप से लगवाने की तैयारियों 2015 में शुरु हो गई थी। साल 2015 में ही एम शिक्षा मित्र योजना लागू कर कर दी गई थी।
  • एम शिक्षा मित्र एप के 5.3 वर्जन में आ रही तकनीकी खामियों को देखते हुए इस साल 5.6 का नया वर्जन तक तैयार किया गया। प्रभावी तरीके से लागू कर शिक्षकों के अलावा अधिकारी, कर्मचारियों के लिए भी ई-अटेंडेंस अनिवार्य किया गया था।
  • शिक्षा विभाग के तकनीकी विभाग (एनआईसी) ने एम शिक्षा मित्र के नए वर्जन में ई-अटेंडेंस, स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति का पता लगाने सहित शिक्षक, कर्मचारियों को अवकाश, पे-स्लिप, सर्विस बुक सहित अन्य जानकारी एप के माध्यम से उपलब्ध कराने की सुविधा दी है।

आगे क्या-
  • सीएम ने घोषणा कर ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता खत्म कर शिक्षकों को खुश कर दिया है। अब शिक्षक और विभागीय अधिकारी शिक्षा विभाग के लिखित आदेश के इंतजार में हैं। जिसमें स्पष्ट हो कि ई-अटेंडेंस अनिवार्य नहीं, स्वेच्छा से लगाई जाए।
  • घोषणा के बाद अधिकांश शिक्षकों ने ये भी तय कर लिया है कि वह ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो स्वेच्छा से ई-अटेंडेंस लगाने की बात कह रहे हैं।

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