आदिवासियों पर दर्ज 15 हजार अपराध वापस लेगी मध्यप्रदेश सरकार || MP NEWS

भोपाल। प्रदेश में आदिवासियों पर दर्ज करीब 15 हजार वन अपराध राज्य सरकार वापस लेगी। सरकार स्तर पर यह फैसला होने के बाद वन विभाग ने हर साल दर्ज होने वाले करीब 50 हजार वन अपराधों में से आदिवासियों के प्रकरणों की छंटाई शुरू कर दी है।
विभाग का दावा है कि इस संबंध में निर्देश आते ही कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी। आदिवासियों पर वन भूमि पर कब्जे, अवैध कटाई सहित अन्य मामलों में पिछले नौ साल में करीब 15 हजार प्रकरण दर्ज हुए हैं।
सरकार ने आदिवासियों पर दर्ज आपराधिक प्रकरण वापस लेने का निर्णय लिया है। इसमें वन अपराध भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक जंगलों में रहने और रोजमर्रा की जरूरतों के चलते आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अपराध भी वन विभाग ही दर्ज करता है। इसमें लकड़ी चोरी, वनभूमि पर अतिक्रमण और शिकार के मामले होते हैं। वर्ष 2008 से अब तक हर साल करीब डेढ़ हजार मामले दर्ज हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि विभाग आमतौर पर हर साल 50 हजार वन अपराध दर्ज करता है। इनमें से करीब आठ हजार मामले आदिवासियों के खिलाफ दर्ज किए जाते हैं। जबकि करीब छह हजार मामले पांच सौ, एक हजार रुपए के अर्थदंड के बाद समाप्त हो जाते हैं औरशेष मामले कोर्ट तक पहुंचते हैं।
2008 में भी वापस लिए थे प्रकरण
सरकार ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले वर्ष 2008 में भी आदिवासियों के खिलाफ तमाम कोर्ट में चल रहे आपराधिक प्रकरण वापस लिए थे। तब विभाग ने 87 हजार 549 वन अपराध वापस लिए थे।
मुख्यमंत्री का पत्र नहीं पहुंचा
वर्ष 2008 में मुख्यमंत्री ने यह भी तय किया था कि जिन आदिवासियों के खिलाफ चल रहे वन अपराध वापस लिए गए हैं, उन्हें बतौर सूचना मुख्यमंत्री की ओर से एक पत्र भेजा जाए। ताकि संबंधित प्रकरण को लेकर कोई उन्हें परेशान न करे और जरूरत पड़ने पर वे उसे दिखा सकें। सूत्र बताते हैं कि पत्र का प्रारूप भी तैयार हुआ और अनुमोदन भी हुआ, लेकिन पत्र आदिवासियों तक नहीं पहुंचे। हालांकि विभाग के अफसर कहते हैं कि पत्र बांटे गए हैं।
तैयारी शुरू कर दी है
अभी निर्देश नहीं आए हैं, लेकिन हमने तैयारी शुरू कर दी है। जैसे ही निर्देश आएंगे आगे की कार्यवाही की जाएगी।  - बीके मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक, संरक्षण

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