REWA NEWS | चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा आयुर्वेद अस्पताल ,पैरामेडिकल स्टॉफ में भी भारी कमी


रीवा | जिले के एकमात्र शासकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की व्यवस्था डगमगाती नजर आ रही है। चिकित्सालय में कुदरती जड़ी बूटियों के माध्यम से रोगों एवं कई गंभीर बीमारियों का उपचार किया जाता है। परंतु अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। साथ ही साथ मरीजों की देखरेख करने के लिए विभाग में सिर्फ पांच नर्स हैं।
वहीं टेक्नीशियन की संख्या शून्य है। ऐसे में अस्पताल संचालित करने में काफी समस्याएं आ रही हैं। परंतु शासन द्वारा रिक्त पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं की जा रही है। जबकि अस्पताल में कई मरीज भर्ती होते हैं और उनका उपचार भी अन्य चिकित्सालयों की तरह होता है। मगर शासन आयुर्वेद अस्पताल के प्रति गंभीर नजर नहीं आता। 
शहर के निपनिया इलाके में स्थित आयुर्वेद अस्पताल पूरे जिले का एकमात्र जड़ी बूटियों से उपचार करने वाला स्वास्थ्य केन्द्र है। जहां प्रतिदिन कई गंभीर रोगी भर्ती होते हैं। जिनका कुदरती दबाव के जरिये उपचार किया जाता है।  यही नहीं आयुर्वेद भारतीय संस्कृति एवं इतिहास का एक अहम हिस्सा है। आयुर्वेद की दवाओं का आज भी बड़े पैमाने पर सेवन किया जाता है। जिससे बीमार व्यक्ति को दुष्परिणाम नहीं होता। फिर भी आयुर्वेद अस्पताल की ऐसी हालत होना शासन की उदासीनता को दर्शाती है। अस्पताल के डीन का कहना है कि स्टाफ पूरा न हो पाने से  जो सेवाएं एवं जिस स्तर का हम अस्पताल बनाना चाहते हैं, वह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। जबकि शासन की नजरों से कुछ भी छिपा नहीं है। उसके बावजूद भी आयुर्वेद अस्पताल पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
नहीं है एक्स-रे मशीन
आयुर्वेद चिकित्सालय में वर्षों पुरानी एक्स-रे मशीन जो पूरी तरह से कंडम हो चुकी है। भर्ती मरीजों को एक्स-रे फिल्म बनवाने के लिए अस्पताल के पास कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा नई मशीन मंगाने के लिए चिकित्सा शिक्षा को कई बार पत्र लिखा गया है परंतु अभी तक नई एक्स-रे मशीन खरीदी करने की हरी झण्डी नहीं मिल पाई है। खास बात यह है कि आधुनिक युग में डिजिटल एक्स-रे मशीन के आने के बाद पुरानी मशीनों का चलन भी समाप्त हो गया है। बावजूद आयुर्वेद चिकित्सालय सहित कई ऐसे चिकित्सालय हैं जहां पर पुरानी मशीन से ही काम चलाया जा रहा है।
शासकीय आयुर्वेद अस्पताल में मेडिकल आॅफीसर यानी चिकित्सकों का कुल स्वीकृत पद 12 है परंतु अस्पताल संचालन एवं दर्जनों मरीजों के उपचार के लिए सिर्फ 4 डॉक्टर उपलब्ध हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई बार रिक्त पदों से होने वाली समस्याओं को शासन से जाहिर किया परंतु मेडिकल आॅफीसर की नियुक्ति नहीं की जा रही है। ऐसे में आयुर्वेद अस्पताल की व्यवस्था पर प्रभाव तो पड़ता ही है साथ ही साथ संस्कृति से जुड़े हुए उपचार का अस्तित्व खतरे में दिखाई पड़ रहा है।
पैरामेडिकल स्टॉफ में भी भारी कमी
मरीजों की देखरेख करने के लिए अस्पताल में नर्सों एवं तकनीशियनों के कुल 28 पद हैं परंतु चिकित्सालय में सिर्फ 5 नर्स कार्यरत हैं। वहीं तकनीशियन की संख्या शून्य है। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था डांवाडोल चल रही है। विभाग के पास अपने रेग्युलर भृत्य एवं स्वीपर भी नहीं हैं जिस कारण से अस्पताल की नियमित रूप से साफ-सफाई नहीं हो पाती है। 
पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से अस्पताल संचालन में दिक्कतें तो आती हैं साथ ही साथ मरीजों को जो सुविधा हम देना चाहते हैं वह देने में असमर्थ हैं।
डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ, डीन आयुर्वेद चिकित्सालय

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