प्रति माह 10 हजार से 15 हजार मिल रही तनख्वाह , घर बैठे मार रहे मलाई | REWA NEWS

रीवा | जिले में सड़क की बदहाल हालत के जबावदार पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और कर्मचारी हैं। जो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों काम न लेने के बजाय घर बैठे तनख्वाह देते हैं। जिसका सबसे बड़ा  कारण है अपने सगे संबधी को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पद पर काम देना। जिस कारण इनको अधिकारियों से लेकर बाबुओं तक संरक्षण प्राप्त है। जिले में करीब 1150 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन मैदानी अमले में मात्र 20 प्रतिशत कर्मचारी नजर आते हैं।

जिसमें से 20 प्रतिशत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सरकारी बंगलों में डियूटी देते हैं।  बीस प्रतिशत कर्मचारी आफिस में बैठ कर समय गुजारते नजर आते हैं। मात्र 20 प्रतिशत कर्मचारियों से सड़क का मरम्मत  कार्य कराया जा रहा है। इसी तरह करीब 30 प्रतिशत कर्मचारी घर बैठ कर तनख्वाह ले रहे हैं। ये तीस प्रतिशत ऐसे कर्मचारी हैं जो पीडब्लूडी के एसडीओ, सब इंजीनियर, बाबू से लेकर विभग में पदस्थ चपरासी तक के सगे संबंधी शामिल हैं। इतना ही नहीं कई तो नेताओं के नजदीकी रिश्तेदार भी हैं। जो घर बैठे तनखाह ले रहे हैं। लेकिन अधिकारी इन से काम लेने के बजाय इन्हें खूली छूट दिए हुए है। बिना काम करके तनख्वाह लेने वाले कर्मचारी विगत 10 से 15 वर्षों से रजिस्टर में नौकरी कर रहे हैं।
इन कर्मचारियों से किसी भी अधिकारी ने काम लेने की जहमत नहीं उठाई।  सूत्रों की मानें तो वर्षों से जमे यह कर्मचारी पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों के सगे संबंधी हैं जिन्हें न तो ड्यूटी करने में रुचि रहती है और न ही इनकी पेमेंट में ही कटौती की जाती है। कई कर्मचारी ऐसे देखे गए हैं जो घर की खेती-किसानी करते हैं और वह आॅफिस नहीं जाते। उनका न तो कोई रजिस्टर बना है और न ही मॉनीटरिंग करने वाला कोई है। वेतन के लिए बैंकों में खाते खुले हुए हैं जो सीधे पैसा उनके खाते में जा रहा है। यही वजह है कि वह नौकरी पर ज्यादा ध्यान न देकर अपने निजी काम में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
प्रति माह 10 हजार से 15 हजार मिल रही तनख्वाह
जानकारों का कहना है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को 10 हजार से लेकर 15 हजर तक वेतन दिया जाता है। जिसमें से 20 प्रतिशत इस तरह के कर्मचारी हैं जिन्हें अधिाकरी इन्हें बैठने का तनख्वाह देती है। इतना ही नहीं ये बैठे हुए कर्मचारियों की अगर कोई अधिकारी डियूटी लगाता है तो यही कर्मचारी नेतागिरी करने में उतारू हो जाते हैं। 
एलडीटी यूडीटी से लेकर चपरासी तक दैनिक वेतन भोगी
पीडब्ल्यूडी की हालत देखकर ऐसा लगता है कि यहां के कर्मचारियों का चले तो अपने सगे संबंधी को अधिकारी बना कर पीडब्ल्यूडी आफिस में बैठा दें। पीडब्ल्यूडी आफिस में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों एलडीटी से लेकर भृत्य पद का काम कर रहे हैं। यही वजय है दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सड़क की मरम्मत करने के बजाय अन्य काम कर रहे हैं।
यह सही है कि मैदानी अमले में कर्मचारी गायब रहते हैं। उसके लिए मैं एक रजिस्टर बनवा रहा हूं। जहां तक वेतन की बात है वह उनके खाते में जाने लगी है। फिर भी मैं कोशिश कर रहा हूं कि वह नियमित ड्यूटी आएं। आधे कर्मचारी भी अगर सही ढंग से काम करें तो विभाग के काम में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी।
केपी लखेरा, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग रीवा

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