रीवा के पटवारियों ने फाड़ दिए साढ़े तीन हजार नक्शे, जानिए क्यों


रीवा. राजस्व अफसरों की अनदेखी के चलते रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली में सैकड़ों गांवों के नक्शे जर्जर हो गए। जिससे जमीनों का सीमांकन, नक्शा तरमीम सहित अन्य कार्यों के लिए भू-स्वामी परेशान हैं। संभाग में पटवारियों के अव्यवस्थित रखरखाव के कारण राजस्व गांवों के साढ़े तीन हजार से ज्यादा नक्शे जर्जर (फटे-पुराने) हो गए हैं। डिजिटाइज्ड नक्शे की शीट जारी होने के बाद भी पटवारी लापरवाह बने हैं।
रीवा में दो हजार से ज्यादा खस्ताहाल हो गए नक्शे
संभाग में 6864 राजस्व गांव बनाए गए हैं। रीवा में कुल 2817 राजस्व गांव हैं। जिसमें 11 नए राजस्व गांव भी शामिल हैं। अकेले रीवा में सैकड़ो गांव के दो हजार से ज्यादा नक्शे खस्ताहाल हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर हुजूर तहसील क्षेत्र के टीकर गांव का नक्श जर्जर हो गया है। टीकर गांव के कैलाश बताते हैं कि नक्शा तरमीम के लिए आवेदन दिया है। तीन माह बीतने के बाद भी पटवारी नक्शा तरमीम की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसी तरह मऊगंज तहसील क्षेत्र के हर्रा कोठार गांव का नक्शा जर्जर हो गया है।
नामांतरण और नक्शा तरमीम में दिक्कत
पटवारी रेवाधर वर्मा ने डिजिटलाइज्ड नक्शा जारी करने के लिए एसएलआर को आवेदन दिया है। हर्रा कोठार गांव के कई किसानों ने बताया कि नक्शा क्षतिग्रस्त होने के कारण सीमांकन नहीं हो रहा है। सोनवर्षा गांव के शिवकुमार साकेत ने बताया कि नक्शा जर्जर होने के कारण तहसील में राजस्व प्रकरण प्रभावित है। तहसीलदार के आदेश के बाद भी नक्शा तरमीम नहीं हो सका है। जिसके कारण न्यायालय में रिपोर्ट सबमिट नहीं होने से प्रकरण प्रभावित है।
सिंगरौली में 11 वन गांव के नक्शे भी धुंधले
पटवारियों के बेतरतीब रखरखाव के चलते सिंगरोली जिले के 11 वन ग्राम के नक्शे में भी खराब हो गए हैं। वन क्षेत्र में आसपास की जमीनों के सीमांकन में परेशानी हो रही है। तहसीलों में वन क्षेत्र की भूमियों पर अतिक्रमण हो गया है। नक्शे के कारण सीमांकन की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उधर, सीधी जिले में करवाही वन ग्राम है जिसका नक्शा मटमैला हो गया है।
नक्शा बनाने जहमत नहीं उठा रहे पटवारी
जिले में 462 पटवारी हल्के में 4562 नक्शा शीट हैं। पटवारियों की लापरवाही के चलते जर्जर हो चुके नक्शों को लैंड रिकार्ड में न तो जमा किया जा रहा है और न ही नक्शा नया बनाने की जहमत उठा रहे हैं। कार्यालय सूत्रों के अनुसार कई पटवारी नक्शा बनाने से बचने के लिए नए नक्शा के लिए आवेदन नहीं दे रहे हैं।</

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