सरकार का संविदा शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा ऐलान, जानिए किसे मिलेगा सीधा फायदा | MP NEWS


भोपाल। संविदा शिक्षक भर्ती को लेकर हाल ही में एक बड़ा ऐलान हुआ है। इस ऐलान के बाद मध्य प्रदेश की महिलाओं में खुशी की लहर है। अगर आप इस खबर से अनजान हैं तो आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में 2018 में होने जा रही मप्र संविदा शिक्षक भर्ती में कुल 40 हजार रिक्त पदों में से 20 हजार महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। दो दिन पहले प्रदेश स्तरीय महिलाओं के स्वसहायता समूहों के सम्मेलन में इस बात का ऐलान खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया है। इतना ही नहीं इस सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ये भी ऐलान किया कि मध्य प्रदेश के अंतर्गत होने वाले चुनावो में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाएगा।
हालांकि बड़ा सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि आखिर संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती कब होगी। क्योंकि पिछले चुनावों से ठीक पहले यानि 2013 में राज्य सरकार ने संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। लेकिन इससे पहले कि भर्ती हो पाती, परीक्षा के नियम ही तैयार नहीं हो पाए। इस बीच चुनाव आ चुके थे और भर्ती पर रोक लग गई। चुनाव में एक बार फिर से बीजेपी को जीत हासिल हुई और संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती के लिए नियम तैयार करना शुरू किया गया।
नियम तैयार करने के बाद से सरकार दो बार नियम जारी कर चुकी है, लेकिन परीक्षाएं नहीं हो पाईं। हालांकि इसके लिए तैयारियां चलती रहीं, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से परीक्षा टल गई। मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड यानि पीईबी भी 3 बार परीक्षा की संभावित तारीखें घोषित कर चुका है, लेकिन इसके बाद आगे नहीं बढ़ा जा सका।
भर्ती नहीं हो पाई, दोगुनी हो गई रिक्त पदों की संख्या
इस बीच बड़ी बात ये भी रही कि भर्ती नहीं हो पाने की वजह से संविदा शाला शिक्षकों के रिक्त पद 22 हजार से बढ़कर 41 हजार तक पहुंच गए। बाद में वित्त विभाग की आपत्ति के बाद रिक्त पदों को कम कर दिया गया। वित्त विभाग की आपत्ति के बाद लगभग 9560 पद कम कर दिए गए। ताजा जानकारी के मुताबिक करीब 40 हजार पदों पर भर्ती होगी। बहरहाल सरकार के इस फैसले को चुनावी फायदा लेने वाला बताया जा रहा है क्योंकि इतना समय बीत जाने के बाद भी परीक्षा कब होगी इस बात पर संशय बना हुआ है। हालांकि महिलाओं के लिए 20 हजार पदों पर भर्ती के ऐलान के बाद अब इस परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों के लिए कड़ी मुश्किलें खड़ी होती दिखाई दे रही हैं।<

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