बड़ी खबर: अब डॉक्टर बनने के लिए देना होगा ये एक्जाम, नहीं तो मान्य नहीं होगी डिग्री | NATIONAL NEWS


भोपाल। बीते दिनों पहले ही मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस में बढ़ोत्तरी कर दी गई थी। भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज सहित चार निजी विवि में संचालित एमबीबीएस कोर्स की फीस में 6 फीसदी की वृद्धि कर दी गई। इसके बाद प्रदेश के निजी कॉलेजों की फीस सालाना छह लाख व इससे आसपास हो गई। समिति ने पुराने चार कॉलेजों की फीस में भी बढ़ात्तरी की थी। इसके साथ ही इंदौर के श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज और भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज की फीस में 35 हजार का इजाफा किया गया। फीस बढ़ने के बाद अब डॉक्टर बनने के लिए लोगों को फीस ज्यादा भरने के साथ ही एक एक्जाम भी क्वालीफाई करना होगा। जी हां डॉक्टर बनने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस टेस्ट को नए साल से अनिवार्य कर दिया गया है।
नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट (नीट) को लेकर जारी होने वाली अधिसूचना में यह प्रावधान जुड़कर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने एमबीबीएस में एडमिशन के लिए चिकित्सा शिक्षा नियमन कानून में संशोधन किया था। इसके बाद भारत में डॉक्टर बनने के लिए नीट जरूरी कर दिया गया है। इसके अंतर्गत अब कोई भी भारतीय यदि डॉक्टर बनना चाहता है तो पहले ये एक्जाम क्लीयर करना होगा। साथ ही कोई विदेशी नागरिक अगर भारत देश आकर मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता है उसे भी ये एक्जाम पास करना अनिवार्य है।

नहीं मान्य होगी डिग्री
अगर आप मेडिकल की पढ़ाई के लिए नीट का एक्जाम क्वालीफाई कर लेते हैं तो ही आपको एमसीआई से अहर्ता प्रमाण पत्र मिल सकेगा। आपको बता दें विदेश जाने के लिए एमसीआई से अहर्ता प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है। ये प्रमाण पत्र अब उन्हीं को दिया जाएगा जो ये एक्जाम पास कर लेगें।
अगर कोई भी बिना नीट पास किए हुए मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाता है तो उसकी ये डिग्री मान्य नहीं होगी। ये आदेश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2018-19 के सत्र से शुरू होने जा रहा है। नीट अनिवार्य करने के बाद इसमें कुछ बदलाव भी किए गए हैं, जिसके अंतर्गत सामान्य वर्ग के 25 साल तक और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार 30 साल तक के लोग ही इस परीक्षा को दे सकते हैं। तीन प्रयासों का प्रावधान खत्म करने के साथ नीट की परीक्षा साल में दो बार होगी और छात्रों के बेस्ट स्कोर को शामिल किया जाएगा।

भारत से हर साल 10 हजार स्टूडेंट जाते हैं विदेश
आपको बता दें कि कि भारत से हर साल 10 हजार के करीब स्टूडेंट मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। अभी चीन में 15 हजार, रूस में सात हजार तथा अन्य देशों में करीब छह हजार छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई की वजह सरलता से एडमिशन मिलना है और भारत में निजी कॉलेजों की तुलना में सस्ता होना है। रूस, चीन समेत कई देशों में मेडिकल की सीटें बहुत हैं, वहां आसानी से छात्रों को बिना किसी टेस्ट के एडमिशन मिल जाता है जबकि भारत में एडमिशन बेहद कठिन है।

No comments

Powered by Blogger.