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रीवा : 9 जगहों से ध्वस्त हो गई दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर सफारी की दीवार

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2017-07-15 06:33:21

मुकुंदपुर के मांद में बनाई गई विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू रेस्क्यू सेंटर के निर्माण में की गई अनियमितता उजागर होने लगी है। वन्य प्राणियों की सुरक्षा की सबसे अहम कड़ी मानी गई टाइगर सफारी की दीवार पहली ही बारिश में धराशायी हो गई है। कुल नौ स्थानों से टूट चुकी इस दीवार पर दो करोड़ रुपए व्यय हुए हैं। इस अनियमितता के लिए ठेकेदार के साथ-साथ तत्कालीन अधिकारी की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। निर्माण में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया फलस्वरूप दीवार का यह हश्र हुआ है।

गौरतलब है कि मुकुंदपुर में विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी का प्रोजेक्ट 125 करोड़ का है। जिसमें से अभी तक 65 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। टाइगर सफारी के साथ-साथ बनाए गए वन्य प्राणियों के रहने के लिए बाड़े, तालाब, दीवार एवं नाइट हाउस  के निर्माण की पोल खुलने लगी है। तत्कालीन अधिकारियों की देखरेख में किए जाने वाले इस कार्य का दायित्व ठेकेदार भरत सिंह को दिया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि ठेकेदार द्वारा किए गए निर्माण कार्य की गुणवत्ता को विभागीय अधिकारियों ने कभी परखने की कोशिश नहीं की। लिहाजा इस दौरान राशि का भुगतान किया जाता रहा। सूत्रों की मानें तो मुकुंदपुर जू रेस्क्यू सेंटर में किए गए निर्माण कार्य में तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत है। जिसके चलते किए गए निर्माण कार्य गुणवत्ताविहीन दिख रहे हैं। यही वजह है कि पहली ही बारिश में दो करोड़ की लागत से बनाई गई टाइगर सफारी की दीवार जमींदोज हो गई।

बारिश में टूटा सांभर के बाड़े का गेट
जू रेस्क्यू सेंटर मुकुंदपुर में बनाए गए बाड़ों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। बताया गया है कि सांभर के लिए जो बाड़ा का निर्माण किया गया था वह भी बारिश की भेंट चढ़ गया है। जर्जर हालत में इस बाड़े के गेट का कर्मचारियों ने वैकल्पिक इंतजाम तो कर लिया है परंतु बाड़ों के घटिया निर्माण की कलई खुलकर सामने आ गई है। बताया गया है कि बारिश के बाद बने बाढ़ जैसे हालात से परिसर के अंदर घुसे पानी ने सांभर के बाड़े को डुबो दिया था। प्रबंधन द्वारा सांभरों को अन्य जगह तो शिफ्ट कर दिया गया था परंतु सांभर के बाड़े का गेट बारिश के पानी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और वह टूट गया। ऐसे में प्रबंधन के कर्मचारियों द्वारा उक्त बाड़े के गेट की वैकल्पिक व्यवस्था अभी बनाई गई है।

डीपीआर के मापदंडों को किया दरकिनार
व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू रेस्क्यू सेंटर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के पहले दिए गए टेण्डर में जो अनुबंध ठेकेदार एवं विभागीय प्रबंधन के बीच किए गए थे, उन मापदण्डों को दरकिनार कर निर्माण कराया गया है। बताया गया है कि जो दीवार बनाई जानी थी उसमें पिलर देने की बात थी। ऐसे में अगर उक्त दीवार को पिलर देकर बनाया जाता तो वह नहीं गिरती। इस बात की जानकारी तत्कालीन अधिकारियों को होते हुए भी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता को नजरअंदाज किया गया।

सीसीएफ ने मांगी रिपोर्ट
बारिश में नौ जगह से टूट चुकी जू रेस्क्यू सेंटर की दीवार पर मुख्य वन संरक्षक एम. काली दुरई ने निर्माण कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। टाइगर सफारी के निरीक्षण में गए सीसीएफ ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सहित कई अन्य कार्यों को माना है कि वह मापदण्डों से हटकर किए गए हैं। बताया गया है कि दीवार टूट जाने के बाद निरीक्षण पर पहुंचे मुख्य वन संरक्षक द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के बाद जू रेस्क्यू सेंटर मुकुंदपुर के अधिकारियों में हड़कम्प मच गया है। 

125 करोड़ का है प्रोजेक्ट
मुकुंदपुर के मांद में बनाई गई विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी का प्रोजेक्ट 125 करोड़ की लागत का है। जिसमें से अभी तक 65 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। बताया गया है कि टाइगर सफारी के कार्यों का जिम्मा ऐसे लोगों को दिया गया था जो तत्कालीन अधिकारियों के करीबी थे। टाइगर सफारी सहित नाइट हाउस बनकर तैयार हो चुका था। सफेद शेर को लाने की कवायद चल रही थी, ऐसे में दिल्ली से दौरे पर आई जू अथारिटी की टीम ने नाइट हाउस के कुछ कार्यों के गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए थे। लिहाजा संचालक टाइगर सफारी को दोबारा वह काम कराना पड़ा था। तब जाकर सफेद शेर लाने के लिए जू अथारिटी सेंटर से इजाजत दी गई थी। 

18 करोड़ की मिली स्वीकृति
टाइगर सफारी प्रोजेक्ट के लिए अब तक खर्च किए गए 65 करोड़ के बाद अन्य निर्माण कार्यों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 18 करोड़ रुपए की फिर से स्वीकृति मिल गई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही यह राशि जू रेस्क्यू सेंटर प्रबंधन के पास आ जाएगी। अभी तक खर्च की गई राशि के बाद एक बार निर्माण कार्यों के लिए आने वाली वर्ष 2018 की पहली किश्त के रूप में 18 करोड़ रुपए किस तरह से खर्च किए जाएंगे इस पर बराबर नजर रखी जाएगी। बताया गया है कि 2020 तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट में 125 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। 

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